BOARD EXAME CLASS 12

 

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026)

भाग–1 | अध्याय 1 : विद्युत आवेश एवं क्षेत्र

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर (20–40 शब्द)

प्रश्न 1. विद्युत आवेश किसे कहते हैं?
उत्तर: पदार्थ का वह गुण जिसके कारण वह विद्युत आकर्षण या प्रतिकर्षण दिखाता है, विद्युत आवेश कहलाता है। यह धनात्मक और ऋणात्मक दो प्रकार का होता है।

प्रश्न 2. आवेश संरक्षण का नियम लिखिए।
उत्तर: किसी बंद प्रणाली में कुल विद्युत आवेश सदैव स्थिर रहता है, वह न तो उत्पन्न होता है और न ही नष्ट होता है।

प्रश्न 3. कूलॉम का नियम लिखिए।
उत्तर: दो बिंदु आवेशों के बीच बल उनके आवेशों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 4. विद्युत क्षेत्र किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी आवेश के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ वह अन्य आवेशों पर बल लगाता है, विद्युत क्षेत्र कहलाता है।

प्रश्न 5. विद्युत क्षेत्र की तीव्रता की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: किसी बिंदु पर रखे गए इकाई धनात्मक परीक्षण आवेश पर लगने वाला बल उस बिंदु की विद्युत क्षेत्र तीव्रता कहलाता है।

प्रश्न 6. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ क्या दर्शाती हैं?
उत्तर: विद्युत क्षेत्र रेखाएँ क्षेत्र की दिशा और सापेक्ष तीव्रता को दर्शाती हैं तथा धन आवेश से निकलकर ऋण आवेश पर समाप्त होती हैं।

प्रश्न 7. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को क्यों नहीं काटतीं?
उत्तर: क्योंकि किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा एक ही हो सकती है, दो दिशाएँ संभव नहीं।

प्रश्न 8. विद्युत फ्लक्स किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी सतह से होकर गुजरने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की कुल संख्या को विद्युत फ्लक्स कहते हैं।

प्रश्न 9. गाउस का नियम लिखिए।
उत्तर: किसी बंद सतह से निकलने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस सतह के भीतर स्थित कुल आवेश के समानुपाती होता है।

प्रश्न 10. गाउस नियम का एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: सममित आवेश वितरण के लिए विद्युत क्षेत्र की गणना में गाउस नियम अत्यंत उपयोगी है।

प्रश्न 11. विद्युत द्विध्रुव किसे कहते हैं?
उत्तर: समान परिमाण के दो विपरीत आवेश जो बहुत कम दूरी पर स्थित हों, विद्युत द्विध्रुव कहलाते हैं।

प्रश्न 12. विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: आवेश के परिमाण और दोनों आवेशों के बीच दूरी के गुणनफल को विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं।

प्रश्न 13. समान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर क्या प्रभाव होता है?
उत्तर: समान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर बल शून्य होता है लेकिन घूर्णन आघूर्ण लगता है।

प्रश्न 14. असमान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर क्या प्रभाव होता है?
उत्तर: असमान विद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर बल और घूर्णन आघूर्ण दोनों लगते हैं।

प्रश्न 15. चालक में विद्युत क्षेत्र का मान क्या होता है?
उत्तर: स्थिर वैद्युत अवस्था में चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।

प्रश्न 16. चालक की सतह पर आवेश कहाँ रहता है?
उत्तर: चालक में सारा अतिरिक्त आवेश उसकी बाहरी सतह पर स्थित रहता है।

प्रश्न 17. तीव्र किनारों पर आवेश अधिक क्यों होता है?
उत्तर: कम वक्रता त्रिज्या वाले भागों पर विद्युत क्षेत्र अधिक होता है, इसलिए आवेश घनत्व अधिक होता है।

प्रश्न 18. वैद्युत प्रेरण किसे कहते हैं?
उत्तर: बिना संपर्क के पास रखे आवेश के कारण किसी चालक में आवेशों का पुनर्वितरण वैद्युत प्रेरण कहलाता है।

प्रश्न 19. स्थिर वैद्युत संतुलन की दो शर्तें लिखिए।
उत्तर: चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है और आवेश केवल सतह पर रहता है।

प्रश्न 20. विद्युत क्षेत्र की SI इकाई लिखिए।
उत्तर: न्यूटन प्रति कूलॉम (N/C) या वोल्ट प्रति मीटर (V/m)।

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026)

भाग–2 | अध्याय 2 : स्थिर वैद्युत विभव एवं धारिता

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. वैद्युत विभव किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी बिंदु पर इकाई धनात्मक आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य वैद्युत विभव कहलाता है।

प्रश्न 2. वैद्युत विभव की SI इकाई लिखिए।
उत्तर: वैद्युत विभव की SI इकाई वोल्ट (Volt) होती है।

प्रश्न 3. वैद्युत विभवांतर किसे कहते हैं?
उत्तर: दो बिंदुओं के बीच इकाई आवेश को ले जाने में किया गया कार्य वैद्युत विभवांतर कहलाता है।

प्रश्न 4. वैद्युत विभव और विद्युत क्षेत्र में संबंध लिखिए।
उत्तर: विद्युत क्षेत्र वैद्युत विभव के ऋणात्मक प्रवणता के बराबर होता है, अर्थात क्षेत्र उच्च विभव से निम्न विभव की ओर होता है।

प्रश्न 5. समविभव पृष्ठ क्या है?
उत्तर: वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर वैद्युत विभव समान हो, समविभव पृष्ठ कहलाता है।

प्रश्न 6. समविभव पृष्ठ पर कार्य क्यों नहीं होता?
उत्तर: क्योंकि विभवांतर शून्य होता है, इसलिए आवेश को ले जाने में कोई कार्य नहीं होता।

प्रश्न 7. विद्युत द्विध्रुव के कारण विभव किस पर निर्भर करता है?
उत्तर: दूरी, द्विध्रुव आघूर्ण और बिंदु की स्थिति पर निर्भर करता है।

प्रश्न 8. धारिता किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी चालक द्वारा प्रति इकाई विभव पर धारण किए गए आवेश की मात्रा को धारिता कहते हैं।

प्रश्न 9. धारिता की SI इकाई लिखिए।
उत्तर: धारिता की SI इकाई फैरड (Farad) होती है।

प्रश्न 10. संधारित्र किसे कहते हैं?
उत्तर: दो चालक प्लेटों की ऐसी व्यवस्था जो आवेश संचित कर सके, संधारित्र कहलाती है।

प्रश्न 11. समांतर प्लेट संधारित्र क्या है?
उत्तर: दो समानांतर चालक प्लेटों के बीच छोटे अंतराल वाली व्यवस्था को समांतर प्लेट संधारित्र कहते हैं।

प्रश्न 12. समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता किन कारकों पर निर्भर करती है?
उत्तर: प्लेटों के क्षेत्रफल, उनके बीच दूरी और माध्यम की पारगम्यता पर निर्भर करती है।

प्रश्न 13. डाइइलेक्ट्रिक माध्यम का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर: डाइइलेक्ट्रिक माध्यम डालने से संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है।

प्रश्न 14. डाइइलेक्ट्रिक स्थिरांक किसे कहते हैं?
उत्तर: माध्यम के साथ और बिना माध्यम के धारिता के अनुपात को डाइइलेक्ट्रिक स्थिरांक कहते हैं।

प्रश्न 15. संधारित्र में संचित ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर: संधारित्र में आवेश जमा करने में किया गया कार्य संचित ऊर्जा कहलाता है।

प्रश्न 16. संधारित्र की ऊर्जा किन रूपों में रहती है?
उत्तर: विद्युत क्षेत्र के रूप में संचित रहती है।

प्रश्न 17. श्रेणी संयोजन में संधारित्रों की धारिता का क्या होता है?
उत्तर: श्रेणी संयोजन में तुल्य धारिता सबसे कम धारिता से भी कम होती है।

प्रश्न 18. समानांतर संयोजन में संधारित्रों की धारिता का क्या होता है?
उत्तर: समानांतर संयोजन में कुल धारिता सभी धारिताओं के योग के बराबर होती है।

प्रश्न 19. वोल्टमीटर की धारिता अधिक क्यों होती है?
उत्तर: ताकि परिपथ से बहुत कम धारा ले और मापन में त्रुटि न हो।

प्रश्न 20. संधारित्र का एक व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
उत्तर: रेडियो, टीवी, कैमरा फ्लैश और पावर सप्लाई में संधारित्र का उपयोग होता है।

 

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026)

भाग–3 | अध्याय 3 : विद्युत धारा

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. विद्युत धारा किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से प्रति सेकंड प्रवाहित होने वाले कुल विद्युत आवेश की मात्रा को विद्युत धारा कहते हैं। इसका SI मात्रक एम्पियर है और यह आवेश प्रवाह की दर को दर्शाती है।

प्रश्न 2. विद्युत धारा की SI इकाई और परिभाषा लिखिए।
उत्तर: विद्युत धारा की SI इकाई एम्पियर है। जब किसी चालक से प्रति सेकंड एक कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो उस चालक में धारा एक एम्पियर कहलाती है।

प्रश्न 3. धारा घनत्व किसे कहते हैं?
उत्तर: चालक के किसी बिंदु पर इकाई अनुप्रस्थ क्षेत्रफल से प्रवाहित धारा की मात्रा को धारा घनत्व कहते हैं। यह एक सदिश राशि है और इसकी दिशा आवेश प्रवाह की दिशा में होती है।

प्रश्न 4. ओम का नियम लिखिए।
उत्तर: यदि किसी चालक का तापमान और भौतिक अवस्थाएँ स्थिर रहें, तो चालक में प्रवाहित धारा उसके सिरों के बीच लगाए गए विभवांतर के समानुपाती होती है। इसे ओम का नियम कहते हैं।

प्रश्न 5. प्रतिरोध किसे कहते हैं?
उत्तर: चालक का वह गुण जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है, प्रतिरोध कहलाता है। यह चालक की लंबाई, अनुप्रस्थ क्षेत्रफल और पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।

प्रश्न 6. प्रतिरोध की SI इकाई लिखिए और परिभाषा दीजिए।
उत्तर: प्रतिरोध की SI इकाई ओम है। यदि किसी चालक में एक एम्पियर धारा प्रवाहित करने के लिए एक वोल्ट विभवांतर की आवश्यकता हो, तो उसका प्रतिरोध एक ओम कहलाता है।

प्रश्न 7. चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर: चालक का प्रतिरोध उसकी लंबाई, अनुप्रस्थ क्षेत्रफल, पदार्थ की प्रकृति तथा तापमान पर निर्भर करता है। लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है और क्षेत्रफल बढ़ने पर घटता है।

प्रश्न 8. विशिष्ट प्रतिरोध (रेजिस्टिविटी) किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी पदार्थ के इकाई लंबाई और इकाई अनुप्रस्थ क्षेत्रफल वाले चालक का प्रतिरोध उस पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध कहलाता है। यह केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है।

प्रश्न 9. विशिष्ट प्रतिरोध की SI इकाई लिखिए।
उत्तर: विशिष्ट प्रतिरोध की SI इकाई ओम-मीटर होती है। यह किसी पदार्थ के विद्युत गुणों को व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण भौतिक परिमाण है।

प्रश्न 10. तापमान का प्रतिरोध पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: धातुओं में तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि अर्धचालकों और इलेक्ट्रोलाइट्स में तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध घट जाता है। यह प्रभाव चालक के आंतरिक संरचना पर निर्भर करता है।

प्रश्न 11. धारा का सूक्ष्म (माइक्रोस्कोपिक) सिद्धांत समझाइए।
उत्तर: धातु चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की यादृच्छिक गति होती है। बाहरी विद्युत क्षेत्र लगाने पर ये इलेक्ट्रॉन एक नियत दिशा में प्रवाहित होने लगते हैं, जिससे विद्युत धारा उत्पन्न होती है।

प्रश्न 12. बहाव वेग (ड्रिफ्ट वेलोसिटी) किसे कहते हैं?
उत्तर: विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का किसी निश्चित दिशा में औसत वेग बहाव वेग कहलाता है। यही वेग चालक में धारा उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी होता है।

प्रश्न 13. ओमीय और अनओमीय चालक में अंतर लिखिए।
उत्तर: ओमीय चालक ओम के नियम का पालन करते हैं और उनका V–I ग्राफ सीधी रेखा होता है, जबकि अनओमीय चालक ओम के नियम का पालन नहीं करते।

प्रश्न 14. श्रेणी संयोजन में प्रतिरोधों का व्यवहार बताइए।
उत्तर: श्रेणी संयोजन में सभी प्रतिरोधों में समान धारा प्रवाहित होती है और कुल प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है, जो प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध से अधिक होता है।

प्रश्न 15. समानांतर संयोजन में प्रतिरोधों का व्यवहार बताइए।
उत्तर: समानांतर संयोजन में सभी प्रतिरोधों पर समान विभवांतर होता है तथा कुल प्रतिरोध सबसे कम प्रतिरोध से भी कम होता है, जिससे धारा के अनेक मार्ग उपलब्ध होते हैं।

प्रश्न 16. विद्युत ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर: विद्युत परिपथ में आवेशों के प्रवाह के कारण किया गया कार्य विद्युत ऊर्जा कहलाता है। इसे जूल या व्यावहारिक रूप में किलोवाट-घंटा में मापा जाता है।

प्रश्न 17. विद्युत शक्ति किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रति सेकंड विद्युत ऊर्जा के उपभोग की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। यह परिपथ में ऊर्जा के उपयोग की गति को दर्शाती है और इसकी SI इकाई वाट है।

प्रश्न 18. विद्युत शक्ति का सूत्र लिखिए।
उत्तर: विद्युत शक्ति का सूत्र P = VI है। इसके अतिरिक्त P = I²R और P = V²/R सूत्र भी उपयोग किए जाते हैं, जो विभिन्न परिस्थितियों में शक्ति की गणना के लिए प्रयोग होते हैं।

प्रश्न 19. घरेलू परिपथों में फ्यूज का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर: फ्यूज एक सुरक्षा उपकरण है जो अधिक धारा प्रवाहित होने पर पिघलकर परिपथ को तोड़ देता है, जिससे उपकरणों को क्षति और आग लगने की संभावना से बचाया जाता है।

प्रश्न 20. विद्युत धारा के दैनिक जीवन में दो उपयोग लिखिए।
उत्तर: विद्युत धारा का उपयोग प्रकाश व्यवस्था, पंखे, हीटर, मोटर, मोबाइल चार्जिंग तथा विभिन्न औद्योगिक और घरेलू उपकरणों को चलाने में किया जाता है।

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026)

भाग–4 | अध्याय 4 : चल आवेश एवं चुंबकत्व

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. चुंबकीय क्षेत्र किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी चुंबक, धारा वहन करने वाले चालक या गतिमान आवेश के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ चुंबकीय प्रभाव अनुभव किया जा सके, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है। इसे क्षेत्र रेखाओं द्वारा दर्शाया जाता है।

प्रश्न 2. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण लिखिए।
उत्तर: चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र होती हैं, कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं तथा बाहर उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर और भीतर दक्षिण से उत्तर की ओर जाती हैं।

प्रश्न 3. बायो–सावर्ट नियम लिखिए।
उत्तर: किसी धारा वहन करने वाले सूक्ष्म चालक तत्व द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र, धारा के परिमाण के समानुपाती तथा दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। दिशा दाएँ हाथ के नियम से ज्ञात की जाती है।

प्रश्न 4. दाएँ हाथ का अंगूठा नियम क्या है?
उत्तर: यदि दाएँ हाथ के अंगूठे को धारा की दिशा में रखें और उँगलियाँ मोड़ें, तो उँगलियों की मुड़ी दिशा चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती है।

प्रश्न 5. लंबे सीधे चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र पर चर्चा कीजिए।
उत्तर: लंबे सीधे चालक के चारों ओर समकेन्द्रिक वृत्ताकार चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बनती हैं। क्षेत्र की तीव्रता धारा बढ़ने पर बढ़ती है और दूरी बढ़ने पर घटती है।

प्रश्न 6. वृत्ताकार कुंडली द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र समझाइए।
उत्तर: वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र अधिकतम होता है। कुंडली के चक्करों की संख्या और धारा बढ़ाने से चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ जाती है।

प्रश्न 7. सोलनॉइड क्या है और उसका चुंबकीय क्षेत्र कैसा होता है?
उत्तर: सोलनॉइड एक लंबी बेलनाकार कुंडली होती है। इसके अंदर चुंबकीय क्षेत्र लगभग समान होता है और यह दंड चुंबक की तरह व्यवहार करता है।

प्रश्न 8. चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर लगने वाला बल समझाइए।
उत्तर: जब कोई आवेश चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो उस पर चुंबकीय बल लगता है। यह बल आवेश के वेग, क्षेत्र की तीव्रता और दोनों के बीच कोण पर निर्भर करता है।

प्रश्न 9. लॉरेंज बल क्या है?
उत्तर: विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों की उपस्थिति में किसी आवेश पर लगने वाले कुल बल को लॉरेंज बल कहते हैं। यह विद्युत बल और चुंबकीय बल का संयुक्त प्रभाव होता है।

प्रश्न 10. फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम लिखिए।
उत्तर: यदि बाएँ हाथ की पहली उँगली चुंबकीय क्षेत्र, अंगूठा बल की दिशा और मध्य उँगली धारा की दिशा दर्शाए, तो तीनों परस्पर लंबवत होते हैं।

प्रश्न 11. चुंबकीय क्षेत्र में धारा वहन करने वाले चालक पर बल क्यों लगता है?
उत्तर: चालक में प्रवाहित आवेश चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान होते हैं। इनके कारण चुंबकीय बल उत्पन्न होता है, जिससे चालक पर कुल बल लगता है और वह गति कर सकता है।

प्रश्न 12. विद्युत मोटर का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर: विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारा वहन करने वाले चालक पर बल लगता है, जिससे कुंडली घूमने लगती है।

प्रश्न 13. विद्युत मोटर के मुख्य भागों के नाम लिखिए।
उत्तर: विद्युत मोटर के मुख्य भाग कुंडली, चुंबक, स्प्लिट रिंग कम्यूटेटर, ब्रश और धारा स्रोत होते हैं, जो मिलकर यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 14. फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम लिखिए।
उत्तर: दाएँ हाथ की पहली उँगली चुंबकीय क्षेत्र, अंगूठा चालक की गति और मध्य उँगली प्रेरित धारा की दिशा दर्शाती है। यह जनित्र में उपयोगी है।

प्रश्न 15. चुंबकीय फ्लक्स किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी सतह से होकर गुजरने वाली कुल चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की संख्या चुंबकीय फ्लक्स कहलाती है। यह क्षेत्र की तीव्रता और सतह क्षेत्रफल पर निर्भर करता है।

प्रश्न 16. चुंबकीय फ्लक्स की SI इकाई लिखिए।
उत्तर: चुंबकीय फ्लक्स की SI इकाई वेबर होती है। यह चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण को मापने का महत्वपूर्ण मात्रक है।

प्रश्न 17. साइक्लोट्रॉन किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
उत्तर: साइक्लोट्रॉन चुंबकीय क्षेत्र में आवेशित कणों की वृत्ताकार गति और परिवर्ती विद्युत क्षेत्र द्वारा उनकी ऊर्जा बढ़ाने के सिद्धांत पर कार्य करता है।

प्रश्न 18. साइक्लोट्रॉन के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर: साइक्लोट्रॉन का उपयोग नाभिकीय अभिक्रियाओं के अध्ययन, रेडियोधर्मी समस्थानिकों के निर्माण तथा कैंसर उपचार में प्रयुक्त कणों के उत्पादन में किया जाता है।

प्रश्न 19. पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र किस प्रकार का है?
उत्तर: पृथ्वी एक विशाल दंड चुंबक की तरह व्यवहार करती है। इसका चुंबकीय अक्ष भौगोलिक अक्ष से थोड़ा झुका हुआ होता है, जिससे दिशाएँ ज्ञात होती हैं।

प्रश्न 20. चल आवेश एवं चुंबकत्व के दो व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
उत्तर: इस अध्याय के सिद्धांतों का उपयोग विद्युत मोटर, जनित्र, ट्रांसफॉर्मर, एमआरआई मशीन तथा विभिन्न विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है।

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026 )

भाग–5 | अध्याय 5 : चुंबकत्व एवं पदार्थ

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. चुंबकत्व किसे कहते हैं?
उत्तर: पदार्थ का वह गुण जिसके कारण वह चुंबकीय क्षेत्र में आकर्षण, प्रतिकर्षण या अन्य चुंबकीय प्रभाव प्रदर्शित करता है, चुंबकत्व कहलाता है। यह गुण परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की गति और स्पिन के कारण उत्पन्न होता है।

प्रश्न 2. दंड चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर: दंड चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तर ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव में प्रवेश करती हैं। चुंबक के सिरों पर क्षेत्र सबसे अधिक सघन होता है और मध्य भाग में अपेक्षाकृत कम होता है।

प्रश्न 3. चुंबकीय आघूर्ण किसे कहते हैं?
उत्तर: चुंबकीय आघूर्ण दंड चुंबक की शक्ति और दिशा बताने वाली राशि है। यह चुंबक के ध्रुवीय शक्ति और ध्रुवों के बीच दूरी के गुणनफल के बराबर होता है।

प्रश्न 4. चुंबकीय आघूर्ण की SI इकाई लिखिए।
उत्तर: चुंबकीय आघूर्ण की SI इकाई एम्पियर-मीटर² होती है। यह चुंबक के चुंबकीय प्रभाव की तीव्रता को मापने में सहायक होती है।

प्रश्न 5. चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की वह राशि जो वहाँ रखे गए इकाई चुंबकीय ध्रुव पर लगने वाले बल को दर्शाती है, चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता कहलाती है।

प्रश्न 6. चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी पदार्थ को चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर उसमें उत्पन्न चुंबकीय गुण चुंबकीय प्रेरण कहलाते हैं। यह बाह्य क्षेत्र के कारण पदार्थ के अंदर चुंबकीय क्षेत्र के विकास को दर्शाता है।

प्रश्न 7. चुंबकीय पारगम्यता क्या है?
उत्तर: किसी माध्यम की वह क्षमता जिससे वह चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को अपने अंदर प्रवाहित होने देता है, चुंबकीय पारगम्यता कहलाती है। यह माध्यम की चुंबकीय प्रकृति पर निर्भर करती है।

प्रश्न 8. चुंबकीय संवेदनशीलता किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी पदार्थ में चुंबकीकरण और लगाए गए चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता के अनुपात को चुंबकीय संवेदनशीलता कहते हैं। यह बताती है कि पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।

प्रश्न 9. डायामैग्नेटिक पदार्थ क्या होते हैं?
उत्तर: वे पदार्थ जो चुंबकीय क्षेत्र में बहुत कमजोर प्रतिकर्षण दिखाते हैं, डायामैग्नेटिक पदार्थ कहलाते हैं। इनकी चुंबकीय संवेदनशीलता ऋणात्मक होती है, जैसे तांबा और बिस्मथ।

प्रश्न 10. पैरामैग्नेटिक पदार्थ क्या होते हैं?
उत्तर: वे पदार्थ जो चुंबकीय क्षेत्र में कमजोर आकर्षण प्रदर्शित करते हैं, पैरामैग्नेटिक पदार्थ कहलाते हैं। इनकी चुंबकीय संवेदनशीलता धनात्मक लेकिन बहुत कम होती है, जैसे एल्युमिनियम।

प्रश्न 11. फेरोमैग्नेटिक पदार्थ क्या होते हैं?
उत्तर: वे पदार्थ जो बहुत प्रबल चुंबकीय गुण दिखाते हैं और आसानी से चुंबकित हो जाते हैं, फेरोमैग्नेटिक पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण के रूप में लोहा, कोबाल्ट और निकेल आते हैं।

प्रश्न 12. क्यूरी ताप क्या है?
उत्तर: वह तापमान जिसके ऊपर फेरोमैग्नेटिक पदार्थ अपने चुंबकीय गुण खोकर पैरामैग्नेटिक बन जाते हैं, क्यूरी ताप कहलाता है। यह पदार्थ-विशेष पर निर्भर करता है।

प्रश्न 13. हिस्टेरिसिस क्या है?
उत्तर: चुंबकीकरण और चुंबकीय क्षेत्र के बीच होने वाला विलंब हिस्टेरिसिस कहलाता है। इसमें चुंबकीकरण, लगाए गए क्षेत्र के परिवर्तन का तुरंत अनुसरण नहीं करता।

प्रश्न 14. हिस्टेरिसिस लूप का महत्व लिखिए।
उत्तर: हिस्टेरिसिस लूप पदार्थ की चुंबकीय कठोरता, ऊर्जा हानि और स्थायी चुंबक या ट्रांसफॉर्मर कोर के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 15. स्थायी चुंबक किसे कहते हैं?
उत्तर: वे चुंबक जो लंबे समय तक अपने चुंबकीय गुण बनाए रखते हैं, स्थायी चुंबक कहलाते हैं। इन्हें बनाने के लिए उच्च हिस्टेरिसिस और अधिक अवशिष्ट चुंबकत्व वाले पदार्थ उपयोग किए जाते हैं।

प्रश्न 16. विद्युत चुंबक किसे कहते हैं?
उत्तर: वह चुंबक जो विद्युत धारा प्रवाहित करने पर ही चुंबकीय बनता है और धारा बंद करने पर चुंबकीय गुण खो देता है, विद्युत चुंबक कहलाता है।

प्रश्न 17. स्थायी चुंबक और विद्युत चुंबक में अंतर लिखिए।
उत्तर: स्थायी चुंबक बिना धारा के भी चुंबकीय रहता है, जबकि विद्युत चुंबक केवल धारा प्रवाहित होने पर चुंबकीय बनता है और उसका बल धारा से नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 18. चुंबकीय पदार्थों का वर्गीकरण क्यों आवश्यक है?
उत्तर: चुंबकीय पदार्थों का वर्गीकरण उनके व्यवहार, उपयोग और तकनीकी अनुप्रयोगों को समझने में सहायक होता है, जिससे उपयुक्त पदार्थ का चयन किया जा सके।

प्रश्न 19. चुंबकत्व का दैनिक जीवन में एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: चुंबकत्व का उपयोग विद्युत मोटर, जनित्र, ट्रांसफॉर्मर, लाउडस्पीकर, कंपास तथा कंप्यूटर हार्ड डिस्क जैसे उपकरणों में व्यापक रूप से किया जाता है।

प्रश्न 20. चुंबकत्व एवं पदार्थ अध्याय का महत्व लिखिए।
उत्तर: यह अध्याय पदार्थों के चुंबकीय गुणों की व्याख्या करता है और आधुनिक तकनीक, उद्योग तथा चिकित्सा उपकरणों में प्रयुक्त चुंबकीय प्रणालियों को समझने का आधार प्रदान करता है।

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026)

भाग–6 | अध्याय 6 : विद्युतचुंबकीय प्रेरण

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. विद्युतचुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं?
उत्तर: जब किसी चालक या कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन किया जाता है, तो उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। इस घटना को विद्युतचुंबकीय प्रेरण कहते हैं और यह आधुनिक विद्युत उत्पादन का आधार है।

प्रश्न 2. फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण के नियम लिखिए।
उत्तर: फैराडे के अनुसार, चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने पर कुंडली में प्रेरित ईएमएफ उत्पन्न होता है। प्रेरित ईएमएफ का परिमाण फ्लक्स परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।

प्रश्न 3. प्रेरित विद्युत वाहक बल किसे कहते हैं?
उत्तर: चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण कुंडली में उत्पन्न होने वाला विद्युत विभव प्रेरित विद्युत वाहक बल कहलाता है। यही बल परिपथ में प्रेरित धारा प्रवाहित करता है।

प्रश्न 4. लेन्ज का नियम लिखिए।
उत्तर: लेन्ज के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस कारण का विरोध करती है जिससे वह उत्पन्न होती है। यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत के अनुरूप है।

प्रश्न 5. लेन्ज का नियम ऊर्जा संरक्षण से कैसे संबंधित है?
उत्तर: यदि प्रेरित धारा कारण का विरोध न करे, तो ऊर्जा स्वतः उत्पन्न होती रहेगी। विरोध के कारण बाहरी कार्य करना पड़ता है, जिससे ऊर्जा संरक्षण का नियम संतुलित रहता है।

प्रश्न 6. चुंबकीय फ्लक्स किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी सतह से होकर गुजरने वाली कुल चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की संख्या चुंबकीय फ्लक्स कहलाती है। यह चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता, सतह क्षेत्रफल और अभिविन्यास पर निर्भर करता है।

प्रश्न 7. चुंबकीय फ्लक्स की SI इकाई लिखिए।
उत्तर: चुंबकीय फ्लक्स की SI इकाई वेबर होती है। यह बताती है कि किसी सतह से कितनी चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ गुजर रही हैं।

प्रश्न 8. गतिज ईएमएफ किसे कहते हैं?
उत्तर: जब कोई चालक चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है और उसके सिरों पर विभवांतर उत्पन्न होता है, तो उसे गतिज ईएमएफ कहते हैं। यह चालक की गति और क्षेत्र पर निर्भर करता है।

प्रश्न 9. स्वप्रेरण किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी कुंडली में धारा परिवर्तन के कारण उसी कुंडली में उत्पन्न विरोधी ईएमएफ को स्वप्रेरण कहते हैं। यह धारा परिवर्तन का विरोध करता है।

प्रश्न 10. स्वप्रेरण गुणांक किसे कहते हैं?
उत्तर: स्वप्रेरण गुणांक वह राशि है जो कुंडली में उत्पन्न ईएमएफ और धारा परिवर्तन की दर के अनुपात को दर्शाती है। यह कुंडली की रचना पर निर्भर करता है।

प्रश्न 11. पारस्परिक प्रेरण किसे कहते हैं?
उत्तर: जब एक कुंडली में धारा परिवर्तन के कारण पास स्थित दूसरी कुंडली में ईएमएफ उत्पन्न हो, तो इस घटना को पारस्परिक प्रेरण कहते हैं।

प्रश्न 12. पारस्परिक प्रेरण गुणांक किसे कहते हैं?
उत्तर: पारस्परिक प्रेरण गुणांक दो कुंडलियों के बीच प्रेरण की क्षमता को दर्शाता है। यह दोनों कुंडलियों की स्थिति, आकार और माध्यम पर निर्भर करता है।

प्रश्न 13. भंवर धारा (एडी करंट) क्या है?
उत्तर: किसी ठोस चालक में परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र के कारण उत्पन्न बंद वलयाकार धाराओं को भंवर धाराएँ कहते हैं। ये ऊर्जा हानि और ऊष्मा उत्पन्न करती हैं।

प्रश्न 14. भंवर धाराओं के दो हानिकारक प्रभाव लिखिए।
उत्तर: भंवर धाराएँ अनावश्यक ऊष्मा उत्पन्न करती हैं और ऊर्जा हानि का कारण बनती हैं। इससे विद्युत मशीनों की दक्षता कम हो जाती है।

प्रश्न 15. भंवर धाराओं के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर: भंवर धाराओं का उपयोग विद्युत ब्रेक, इंडक्शन भट्ठी और धातु परीक्षण में किया जाता है, जहाँ नियंत्रित ऊष्मा और अवरोध आवश्यक होता है।

प्रश्न 16. प्रेरण कुंडली (इंडक्टर) किसे कहते हैं?
उत्तर: वह विद्युत उपकरण जिसमें स्वप्रेरण का गुण अधिक होता है और जो धारा परिवर्तन का विरोध करता है, प्रेरण कुंडली या इंडक्टर कहलाता है।

प्रश्न 17. ट्रांसफॉर्मर किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
उत्तर: ट्रांसफॉर्मर पारस्परिक प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें प्राथमिक कुंडली की परिवर्तित धारा द्वितीयक कुंडली में ईएमएफ उत्पन्न करती है।

प्रश्न 18. ट्रांसफॉर्मर का एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: ट्रांसफॉर्मर का उपयोग विद्युत ऊर्जा के संचरण में वोल्टेज बढ़ाने या घटाने के लिए किया जाता है, जिससे ऊर्जा हानि कम होती है।

प्रश्न 19. एसी जनित्र का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर: एसी जनित्र विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाने से प्रत्यावर्ती ईएमएफ उत्पन्न होता है।

प्रश्न 20. विद्युतचुंबकीय प्रेरण का दैनिक जीवन में महत्व लिखिए।
उत्तर: यह सिद्धांत विद्युत जनित्र, ट्रांसफॉर्मर, मोटर, इंडक्शन कुकर और आधुनिक विद्युत आपूर्ति प्रणालियों का आधार है, जिससे ऊर्जा उत्पादन और वितरण संभव होता है।

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026)

भाग–7 | अध्याय 7 : प्रत्यावर्ती धारा (AC)

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. प्रत्यावर्ती धारा किसे कहते हैं?
उत्तर: वह विद्युत धारा जिसका परिमाण और दिशा समय के साथ नियमित रूप से बदलते रहते हैं, प्रत्यावर्ती धारा कहलाती है। घरेलू आपूर्ति में प्रयुक्त धारा एसी होती है, जो निश्चित आवृत्ति पर आवर्तित होती है।

प्रश्न 2. प्रत्यावर्ती धारा का तरंग रूप कैसा होता है?
उत्तर: प्रत्यावर्ती धारा का तरंग रूप सामान्यतः साइन तरंग होता है, जिसमें धारा का मान समय के साथ शून्य से अधिकतम, फिर शून्य और ऋणात्मक अधिकतम मान तक बदलता रहता है।

प्रश्न 3. एसी की आवृत्ति किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रति सेकंड धारा के पूरे चक्रों की संख्या एसी की आवृत्ति कहलाती है। भारत में घरेलू एसी आपूर्ति की आवृत्ति 50 हर्ट्ज होती है।

प्रश्न 4. आरएमएस मान किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रत्यावर्ती धारा या वोल्टेज का वह प्रभावी मान जो समान ऊष्मा उत्पन्न करे जैसा समान परिमाण की डीसी उत्पन्न करती है, आरएमएस मान कहलाता है।

प्रश्न 5. शिखर मान और आरएमएस मान में संबंध लिखिए।
उत्तर: साइन तरंगीय एसी के लिए आरएमएस मान शिखर मान का 1/√2 गुना होता है। यह संबंध विद्युत शक्ति की गणना में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 6. शुद्ध प्रतिरोधी एसी परिपथ का वर्णन कीजिए।
उत्तर: शुद्ध प्रतिरोधी एसी परिपथ में धारा और वोल्टेज समान चरण में होते हैं। इसमें कोई चरणांतर नहीं होता और विद्युत ऊर्जा पूरी तरह ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है।

प्रश्न 7. शुद्ध प्रेरक एसी परिपथ में धारा और वोल्टेज का संबंध बताइए।
उत्तर: शुद्ध प्रेरक परिपथ में धारा वोल्टेज से 90 डिग्री पीछे रहती है। इसमें औसत शक्ति शून्य होती है क्योंकि ऊर्जा संग्रहित और वापस लौटती रहती है।

प्रश्न 8. शुद्ध संधारित्र एसी परिपथ में धारा और वोल्टेज का संबंध बताइए।
उत्तर: शुद्ध संधारित्र परिपथ में धारा वोल्टेज से 90 डिग्री आगे रहती है। इसमें भी औसत शक्ति शून्य होती है क्योंकि ऊर्जा संधारित्र में संचित होकर लौटती रहती है।

प्रश्न 9. एसी परिपथ में प्रतिबाधा किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रत्यावर्ती धारा के प्रवाह का कुल विरोध, जिसमें प्रतिरोध, प्रेरक प्रतिरोध और संधारित्र प्रतिरोध शामिल होते हैं, प्रतिबाधा कहलाता है।

प्रश्न 10. प्रतिबाधा की SI इकाई लिखिए।
उत्तर: प्रतिबाधा की SI इकाई ओम होती है। यह परिपथ में एसी धारा के प्रवाह के कुल विरोध को व्यक्त करती है।

प्रश्न 11. आर–एल परिपथ का व्यवहार समझाइए।
उत्तर: आर–एल परिपथ में धारा वोल्टेज से पीछे रहती है। इसमें प्रतिरोध ऊर्जा नष्ट करता है जबकि प्रेरक ऊर्जा संचित और मुक्त करता है, जिससे चरणांतर उत्पन्न होता है।

प्रश्न 12. आर–सी परिपथ का व्यवहार समझाइए।
उत्तर: आर–सी परिपथ में धारा वोल्टेज से आगे रहती है। इसमें संधारित्र ऊर्जा संचित करता है और प्रतिरोध ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में नष्ट करता है।

प्रश्न 13. एल–सी–आर परिपथ किसे कहते हैं?
उत्तर: वह एसी परिपथ जिसमें प्रतिरोध, प्रेरक और संधारित्र तीनों जुड़े हों, एल–सी–आर परिपथ कहलाता है। इसका व्यवहार आवृत्ति पर निर्भर करता है।

प्रश्न 14. अनुनाद किसे कहते हैं?
उत्तर: जब एल–सी–आर परिपथ में प्रेरक और संधारित्र प्रतिरोध बराबर हो जाते हैं, तो परिपथ की प्रतिबाधा न्यूनतम और धारा अधिकतम हो जाती है। इसे अनुनाद कहते हैं।

प्रश्न 15. अनुनाद का महत्व लिखिए।
उत्तर: अनुनाद का उपयोग रेडियो, टीवी ट्यूनिंग, संचार प्रणाली और आवृत्ति चयन में किया जाता है, जहाँ किसी विशेष आवृत्ति की धारा को अधिकतम करना आवश्यक होता है।

प्रश्न 16. शक्ति गुणांक किसे कहते हैं?
उत्तर: वोल्टेज और धारा के बीच कोण के कोसाइन को शक्ति गुणांक कहते हैं। यह बताता है कि परिपथ में कितनी शक्ति उपयोगी कार्य में परिवर्तित हो रही है।

प्रश्न 17. शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ का शक्ति गुणांक कितना होता है?
उत्तर: शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ का शक्ति गुणांक एक होता है, क्योंकि धारा और वोल्टेज समान चरण में होते हैं और अधिकतम शक्ति उपयोगी कार्य में बदलती है।

प्रश्न 18. ट्रांसफॉर्मर में एसी का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर: ट्रांसफॉर्मर केवल प्रत्यावर्ती धारा पर कार्य करता है क्योंकि पारस्परिक प्रेरण के लिए परिवर्तित चुंबकीय फ्लक्स आवश्यक होता है, जो केवल एसी में संभव है।

प्रश्न 19. एसी के दो लाभ लिखिए।
उत्तर: एसी को आसानी से उच्च या निम्न वोल्टेज में बदला जा सकता है तथा लंबी दूरी पर ऊर्जा संचरण में हानि कम होती है, इसलिए यह अधिक उपयोगी है।

प्रश्न 20. प्रत्यावर्ती धारा का दैनिक जीवन में महत्व लिखिए।
उत्तर: घरेलू और औद्योगिक विद्युत आपूर्ति, मोटर, पंखे, हीटर, ट्रांसफॉर्मर और संचार प्रणालियाँ सभी प्रत्यावर्ती धारा पर आधारित होती हैं।

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026)

भाग–8 | अध्याय 8 : विद्युतचुंबकीय तरंगें

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. विद्युतचुंबकीय तरंगें किसे कहते हैं?
उत्तर: वे तरंगें जिनमें विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के तथा तरंग के प्रसार की दिशा के लम्बवत दोलन करते हैं, विद्युतचुंबकीय तरंगें कहलाती हैं। इनके प्रसार के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न 2. मैक्सवेल का विद्युतचुंबकीय तरंग सिद्धांत लिखिए।
उत्तर: मैक्सवेल के अनुसार परिवर्ती विद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। इन दोनों के परस्पर दोलन से विद्युतचुंबकीय तरंगों का प्रसार होता है।

प्रश्न 3. विद्युतचुंबकीय तरंगों के प्रसार के लिए माध्यम क्यों आवश्यक नहीं होता?
उत्तर: क्योंकि इन तरंगों में ऊर्जा का वहन परिवर्ती विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा होता है, न कि कणों के कंपन से। इसलिए ये निर्वात में भी समान रूप से फैल सकती हैं।

प्रश्न 4. विद्युतचुंबकीय तरंगों की चाल निर्वात में कितनी होती है?
उत्तर: निर्वात में विद्युतचुंबकीय तरंगों की चाल लगभग 3×10⁸ मीटर प्रति सेकंड होती है। यह चाल प्रकाश की चाल के बराबर होती है।

प्रश्न 5. विद्युतचुंबकीय तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति समझाइए।
उत्तर: इन तरंगों में विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र तरंग की दिशा के लम्बवत दोलन करते हैं, इसलिए ये अनुप्रस्थ तरंगें होती हैं और ध्रुवण जैसी घटनाएँ प्रदर्शित करती हैं।

प्रश्न 6. विद्युतचुंबकीय तरंगों में ऊर्जा का वहन कैसे होता है?
उत्तर: इन तरंगों में ऊर्जा विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के दोलन के रूप में वहन होती है। ऊर्जा का प्रवाह तरंग की प्रसार दिशा में होता है।

प्रश्न 7. विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम किसे कहते हैं?
उत्तर: विभिन्न तरंगदैर्घ्य या आवृत्ति वाली सभी विद्युतचुंबकीय तरंगों की क्रमबद्ध व्यवस्था को विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं, जिसमें रेडियो तरंगों से लेकर गामा किरणें तक शामिल हैं।

प्रश्न 8. रेडियो तरंगों के गुण और उपयोग लिखिए।
उत्तर: रेडियो तरंगों का तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक होता है। इनका उपयोग रेडियो प्रसारण, टीवी संचार और उपग्रह संचार में किया जाता है क्योंकि ये वायुमंडल से आसानी से गुजरती हैं।

प्रश्न 9. माइक्रोवेव तरंगों के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर: माइक्रोवेव का उपयोग रडार प्रणालियों और माइक्रोवेव ओवन में किया जाता है। ये संचार उपग्रहों में संकेत भेजने और प्राप्त करने में भी सहायक होती हैं।

प्रश्न 10. अवरक्त किरणें क्या हैं और उनका एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: अवरक्त किरणें दृश्य प्रकाश से अधिक तरंगदैर्घ्य वाली तरंगें होती हैं। इनका उपयोग थर्मल इमेजिंग, रिमोट कंट्रोल और गर्म वस्तुओं का पता लगाने में किया जाता है।

प्रश्न 11. दृश्य प्रकाश का विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम में स्थान बताइए।
उत्तर: दृश्य प्रकाश अवरक्त और पराबैंगनी किरणों के बीच स्थित होता है। यही वह भाग है जिसे मानव नेत्र देख सकता है और इससे हमें रंगों का अनुभव होता है।

प्रश्न 12. पराबैंगनी किरणों के दो प्रभाव लिखिए।
उत्तर: पराबैंगनी किरणें जीवाणुनाशक होती हैं और विटामिन-D के निर्माण में सहायक होती हैं। अधिक मात्रा में ये त्वचा और आँखों के लिए हानिकारक भी हो सकती हैं।

प्रश्न 13. एक्स-किरणें क्या हैं और उनका उपयोग बताइए।
उत्तर: एक्स-किरणें बहुत कम तरंगदैर्घ्य वाली उच्च ऊर्जा तरंगें होती हैं। इनका उपयोग चिकित्सा में हड्डियों की जाँच और उद्योगों में दोष परीक्षण के लिए किया जाता है।

प्रश्न 14. गामा किरणों के गुण लिखिए।
उत्तर: गामा किरणों का तरंगदैर्घ्य सबसे कम और ऊर्जा सबसे अधिक होती है। ये अत्यधिक प्रवेश क्षमता रखती हैं और नाभिकीय अभिक्रियाओं में उत्पन्न होती हैं।

प्रश्न 15. विद्युतचुंबकीय तरंगों का ध्रुवण क्या दर्शाता है?
उत्तर: ध्रुवण यह दर्शाता है कि विद्युत क्षेत्र किस दिशा में दोलन कर रहा है। केवल अनुप्रस्थ तरंगें ही ध्रुवण प्रदर्शित कर सकती हैं।

प्रश्न 16. विद्युतचुंबकीय तरंगों में आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य का संबंध लिखिए।
उत्तर: विद्युतचुंबकीय तरंगों के लिए चाल, आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य का संबंध c = νλ होता है, जहाँ c तरंग की चाल, ν आवृत्ति और λ तरंगदैर्घ्य है।

प्रश्न 17. विद्युतचुंबकीय तरंगों का जैविक प्रभाव लिखिए।
उत्तर: विभिन्न तरंगें शरीर पर अलग-अलग प्रभाव डालती हैं। कुछ तरंगें लाभकारी होती हैं जबकि उच्च ऊर्जा तरंगें कोशिकाओं को क्षति पहुँचा सकती हैं।

प्रश्न 18. विद्युतचुंबकीय तरंगों का संचार में महत्व लिखिए।
उत्तर: आधुनिक संचार प्रणाली जैसे रेडियो, टीवी, मोबाइल फोन और उपग्रह संचार विद्युतचुंबकीय तरंगों पर आधारित हैं, जिससे दूरस्थ संचार संभव हो पाया है।

प्रश्न 19. माइक्रोवेव और एक्स-किरणों में एक अंतर लिखिए।
उत्तर: माइक्रोवेव की ऊर्जा कम और तरंगदैर्घ्य अधिक होता है, जबकि एक्स-किरणों की ऊर्जा बहुत अधिक और तरंगदैर्घ्य बहुत कम होता है, इसलिए उनके उपयोग भी भिन्न होते हैं।

प्रश्न 20. विद्युतचुंबकीय तरंगें आधुनिक विज्ञान में क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: ये तरंगें ऊर्जा, सूचना और विकिरण के प्रसार का माध्यम हैं। चिकित्सा, संचार, उद्योग और अंतरिक्ष विज्ञान में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026)

भाग–9 | अध्याय 9 : किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशीय यंत्र

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. किरण प्रकाशिकी किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रकाश के प्रसार को किरणों के रूप में मानकर परावर्तन, अपवर्तन तथा प्रतिबिंब निर्माण का अध्ययन किरण प्रकाशिकी कहलाता है। इसमें प्रकाश की तरंग प्रकृति की उपेक्षा की जाती है।

प्रश्न 2. परावर्तन के नियम लिखिए।
उत्तर: परावर्तन के दो नियम हैं—आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है तथा आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में स्थित होते हैं।

प्रश्न 3. अपवर्तन किसे कहते हैं?
उत्तर: जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है तो उसकी चाल बदलती है, जिससे वह मुड़ जाता है। इस घटना को अपवर्तन कहते हैं।

प्रश्न 4. स्नेल का नियम लिखिए।
उत्तर: किसी दो माध्यमों के लिए आपतन कोण और अपवर्तन कोण के साइन का अनुपात नियत रहता है। इस नियतांक को अपवर्तनांक कहते हैं।

प्रश्न 5. पूर्ण आंतरिक परावर्तन किसे कहते हैं?
उत्तर: जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाते समय क्रांतिक कोण से अधिक आपतन कोण पर पूरी तरह परावर्तित हो जाता है, तो इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।

प्रश्न 6. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्तें लिखिए।
उत्तर: पहली शर्त है कि प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाए तथा दूसरी शर्त यह है कि आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो।

प्रश्न 7. अपवर्तनांक किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी माध्यम में प्रकाश की चाल और निर्वात में प्रकाश की चाल के अनुपात को उस माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं। यह माध्यम की प्रकाशीय घनता दर्शाता है।

प्रश्न 8. क्रांतिक कोण किसे कहते हैं?
उत्तर: वह आपतन कोण जिस पर अपवर्तन कोण 90° हो जाता है, क्रांतिक कोण कहलाता है। यह पूर्ण आंतरिक परावर्तन से संबंधित महत्वपूर्ण कोण है।

प्रश्न 9. दर्पण सूत्र लिखिए और उसका उपयोग बताइए।
उत्तर: दर्पण सूत्र 1/f = 1/v + 1/u है। इसका उपयोग दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात करने में किया जाता है।

प्रश्न 10. आवर्धन किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रतिबिंब की ऊँचाई और वस्तु की ऊँचाई के अनुपात को आवर्धन कहते हैं। यह बताता है कि प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा या छोटा है।

प्रश्न 11. उत्तल दर्पण का एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों में रियर-व्यू मिरर के रूप में किया जाता है क्योंकि यह विस्तृत दृश्य क्षेत्र प्रदान करता है।

प्रश्न 12. अवतल दर्पण का एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: अवतल दर्पण का उपयोग दाढ़ी बनाने के शीशे और वाहन हेडलाइट में किया जाता है क्योंकि यह वस्तु का बड़ा और स्पष्ट प्रतिबिंब देता है।

प्रश्न 13. लेंस किसे कहते हैं?
उत्तर: पारदर्शी माध्यम से बना वह प्रकाशीय उपकरण जो दोनों सतहों से प्रकाश का अपवर्तन करता है, लेंस कहलाता है। यह प्रकाश किरणों को अभिसारित या अपसारित कर सकता है।

प्रश्न 14. उत्तल लेंस का व्यवहार समझाइए।
उत्तर: उत्तल लेंस समानांतर किरणों को फोकस पर अभिसारित करता है। यह वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है।

प्रश्न 15. अवतल लेंस का व्यवहार समझाइए।
उत्तर: अवतल लेंस समानांतर किरणों को अपसारित करता है। यह सदैव आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा प्रतिबिंब बनाता है।

प्रश्न 16. लेंस सूत्र लिखिए।
उत्तर: लेंस सूत्र 1/f = 1/v + 1/u है। इसका उपयोग लेंस द्वारा बने प्रतिबिंब की दूरी ज्ञात करने में किया जाता है।

प्रश्न 17. सरल सूक्ष्मदर्शी का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर: सरल सूक्ष्मदर्शी उत्तल लेंस द्वारा छोटे वस्तु का आवर्धित आभासी प्रतिबिंब बनाता है, जिससे सूक्ष्म वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं।

प्रश्न 18. यौगिक सूक्ष्मदर्शी किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
उत्तर: यौगिक सूक्ष्मदर्शी दो उत्तल लेंसों का उपयोग कर पहले वास्तविक प्रतिबिंब और फिर उसका अत्यधिक आवर्धित आभासी प्रतिबिंब बनाता है।

प्रश्न 19. खगोलीय दूरबीन का उपयोग लिखिए।
उत्तर: खगोलीय दूरबीन का उपयोग दूर स्थित तारों, ग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों को स्पष्ट और आवर्धित रूप में देखने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 20. किरण प्रकाशिकी का व्यावहारिक महत्व लिखिए।
उत्तर: इस अध्याय के सिद्धांत कैमरा, माइक्रोस्कोप, दूरबीन, चश्मे और अन्य प्रकाशीय उपकरणों के निर्माण और कार्य को समझने में अत्यंत उपयोगी हैं।

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026)

भाग–10 | अध्याय 10 : तरंग प्रकाशिकी

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. तरंग प्रकाशिकी किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रकाश के तरंग स्वरूप पर आधारित अध्ययन को तरंग प्रकाशिकी कहते हैं। इसमें प्रकाश की तरंग प्रकृति को मानकर हस्तक्षेप, विवर्तन और ध्रुवण जैसी घटनाओं की व्याख्या की जाती है, जिन्हें किरण प्रकाशिकी से समझाया नहीं जा सकता।

प्रश्न 2. हस्तक्षेप किसे कहते हैं?
उत्तर: जब दो समसंगत प्रकाश तरंगें एक ही बिंदु पर पहुँचती हैं, तो तीव्रता के बढ़ने और घटने की आवर्ती प्रक्रिया होती है। इसी को हस्तक्षेप कहते हैं, जिससे उजली और अंधेरी धारियाँ बनती हैं।

प्रश्न 3. समसंगत स्रोत किसे कहते हैं?
उत्तर: वे प्रकाश स्रोत जिनसे निकलने वाली तरंगों की आवृत्ति समान हो और उनके बीच स्थिर चरणांतर बना रहे, समसंगत स्रोत कहलाते हैं। हस्तक्षेप प्राप्त करने के लिए समसंगत स्रोत आवश्यक होते हैं।

प्रश्न 4. यंग का द्वि-छिद्र प्रयोग क्या सिद्ध करता है?
उत्तर: यंग का द्वि-छिद्र प्रयोग प्रकाश की तरंग प्रकृति को सिद्ध करता है। इस प्रयोग में प्राप्त उजली और अंधेरी धारियाँ हस्तक्षेप का परिणाम होती हैं, जो तरंग गुण का प्रमाण देती हैं।

प्रश्न 5. उजली और अंधेरी धारियाँ क्यों बनती हैं?
उत्तर: उजली धारियाँ तब बनती हैं जब तरंगें समान चरण में मिलती हैं और अंधेरी धारियाँ तब बनती हैं जब वे विपरीत चरण में मिलकर एक-दूसरे को नष्ट कर देती हैं।

प्रश्न 6. पथांतर किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी बिंदु पर पहुँचने वाली दो तरंगों द्वारा तय की गई दूरी के अंतर को पथांतर कहते हैं। यही पथांतर यह निर्धारित करता है कि वहाँ उजली धारी बनेगी या अंधेरी।

प्रश्न 7. विवर्तन किसे कहते हैं?
उत्तर: जब प्रकाश किसी छोटे छिद्र या अवरोध के किनारे से गुजरता है और सीधी रेखा से मुड़कर फैल जाता है, तो इस घटना को विवर्तन कहते हैं। यह भी तरंग प्रकृति का प्रमाण है।

प्रश्न 8. विवर्तन और हस्तक्षेप में अंतर लिखिए।
उत्तर: हस्तक्षेप में दो या अधिक समसंगत तरंगों की परस्पर क्रिया होती है, जबकि विवर्तन में एक ही तरंग किसी अवरोध या छिद्र से गुजरकर मुड़ती और फैलती है।

प्रश्न 9. एकल-छिद्र विवर्तन का स्वरूप समझाइए।
उत्तर: एकल-छिद्र विवर्तन में मध्य उजली धारी सबसे चौड़ी और तीव्र होती है, जबकि दोनों ओर की धारियाँ अपेक्षाकृत संकरी और कम तीव्रता वाली होती हैं।

प्रश्न 10. ध्रुवण किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रकाश तरंगों के विद्युत क्षेत्र को एक ही तल में सीमित कर देने की प्रक्रिया को ध्रुवण कहते हैं। ध्रुवण यह सिद्ध करता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है।

प्रश्न 11. ध्रुवक (पोलरॉइड) किसे कहते हैं?
उत्तर: वह पदार्थ जो प्रकाश के केवल एक ही दिशा के कंपन को गुजरने देता है और अन्य दिशाओं के कंपन को रोक देता है, ध्रुवक कहलाता है। पोलरॉइड इसका सामान्य उदाहरण है।

प्रश्न 12. ध्रुवण से संबंधित एक दैनिक जीवन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर: धूप के चश्मों में ध्रुवक का उपयोग किया जाता है, जिससे परावर्तित चकाचौंध कम होती है और आँखों को आराम मिलता है। यह ध्रुवण का व्यावहारिक उपयोग है।

प्रश्न 13. ब्रूस्टर कोण किसे कहते हैं?
उत्तर: वह आपतन कोण जिस पर परावर्तित प्रकाश पूर्णतः ध्रुवित हो जाता है, ब्रूस्टर कोण कहलाता है। इस कोण पर परावर्तित और अपवर्तित किरणें परस्पर लंबवत होती हैं।

प्रश्न 14. प्रकाश का तरंगदैर्घ्य किसे कहते हैं?
उत्तर: तरंग के दो क्रमागत समान चरण वाले बिंदुओं, जैसे दो शिखरों या दो गर्तों के बीच की दूरी को तरंगदैर्घ्य कहते हैं। यह प्रकाश का एक महत्वपूर्ण गुण है।

प्रश्न 15. तरंग प्रकाशिकी में आवृत्ति का महत्व लिखिए।
उत्तर: प्रकाश की आवृत्ति माध्यम बदलने पर नहीं बदलती। यही कारण है कि रंग का निर्धारण आवृत्ति से होता है, जबकि तरंगदैर्घ्य माध्यम के अनुसार बदल सकता है।

प्रश्न 16. प्रकाश के तरंग स्वरूप के दो प्रमाण लिखिए।
उत्तर: हस्तक्षेप और विवर्तन प्रकाश के तरंग स्वरूप के प्रमुख प्रमाण हैं। ये घटनाएँ केवल तरंग सिद्धांत द्वारा ही समझाई जा सकती हैं।

प्रश्न 17. न्यूटन के कण सिद्धांत की सीमा बताइए।
उत्तर: न्यूटन का कण सिद्धांत हस्तक्षेप, विवर्तन और ध्रुवण जैसी घटनाओं की व्याख्या नहीं कर सका। इसलिए इसे पूर्ण सिद्धांत नहीं माना जाता।

प्रश्न 18. तरंग प्रकाशिकी और किरण प्रकाशिकी में मुख्य अंतर लिखिए।
उत्तर: तरंग प्रकाशिकी प्रकाश को तरंग मानकर घटनाओं की व्याख्या करती है, जबकि किरण प्रकाशिकी प्रकाश को सीधी किरणों के रूप में मानकर प्रतिबिंब निर्माण समझाती है।

प्रश्न 19. तरंग प्रकाशिकी का तकनीकी उपयोग लिखिए।
उत्तर: तरंग प्रकाशिकी के सिद्धांत लेजर तकनीक, होलोग्राफी, ऑप्टिकल फाइबर संचार और सूक्ष्म मापन तकनीकों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।

प्रश्न 20. तरंग प्रकाशिकी अध्याय का महत्व लिखिए।
उत्तर: यह अध्याय प्रकाश की वास्तविक प्रकृति को समझने में सहायक है और आधुनिक प्रकाशीय तकनीकों की नींव रखता है, जिससे विज्ञान और तकनीक के अनेक क्षेत्र विकसित हुए हैं।

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026

भाग–11 | अध्याय 11 : द्वैत प्रकृति (विकिरण एवं पदार्थ)

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. द्वैत प्रकृति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: द्वैत प्रकृति का अर्थ है कि प्रकाश और पदार्थ दोनों में तरंग तथा कण दोनों के गुण पाए जाते हैं। कुछ प्रयोगों में ये तरंग की तरह तथा कुछ में कण की तरह व्यवहार करते हैं।

प्रश्न 2. प्रकाश की कण प्रकृति कैसे सिद्ध होती है?
उत्तर: प्रकाश की कण प्रकृति प्रकाश-वैद्युत प्रभाव द्वारा सिद्ध होती है, जिसमें प्रकाश ऊर्जा कणों (फोटॉनों) के रूप में धातु की सतह से इलेक्ट्रॉनों को बाहर निकालती है।

प्रश्न 3. फोटॉन किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रकाश ऊर्जा के सूक्ष्मतम कण को फोटॉन कहते हैं। प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा उसकी आवृत्ति के समानुपाती होती है और वह निर्वात में प्रकाश की चाल से गति करता है।

प्रश्न 4. प्रकाश-वैद्युत प्रभाव किसे कहते हैं?
उत्तर: जब किसी धातु की सतह पर उपयुक्त आवृत्ति का प्रकाश पड़ने से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं, तो इस घटना को प्रकाश-वैद्युत प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 5. प्रकाश-वैद्युत प्रभाव के दो प्रमुख नियम लिखिए।
उत्तर: पहला, एक न्यूनतम आवृत्ति से कम आवृत्ति पर उत्सर्जन नहीं होता। दूसरा, प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है।

प्रश्न 6. सीमांत आवृत्ति किसे कहते हैं?
उत्तर: वह न्यूनतम आवृत्ति जिससे कम आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु से इलेक्ट्रॉन नहीं निकाल सकता, सीमांत आवृत्ति कहलाती है। यह धातु-विशेष पर निर्भर करती है।

प्रश्न 7. कार्य फलन किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को उस धातु का कार्य फलन कहते हैं। यह धातु की प्रकृति पर निर्भर करता है।

प्रश्न 8. आइंस्टीन का प्रकाश-वैद्युत समीकरण लिखिए और समझाइए।
उत्तर: आइंस्टीन के अनुसार फोटॉन की ऊर्जा = कार्य फलन + इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा। यह समीकरण प्रकाश-वैद्युत प्रभाव को सफलतापूर्वक समझाता है।

प्रश्न 9. प्रकाश-वैद्युत प्रभाव का एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: प्रकाश-वैद्युत प्रभाव का उपयोग फोटोसेल, स्वचालित दरवाजों, प्रकाश मापी यंत्रों और अलार्म प्रणालियों में किया जाता है।

प्रश्न 10. पदार्थ तरंगें किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी गतिमान कण से संबद्ध तरंगों को पदार्थ तरंगें कहते हैं। इनका अस्तित्व डी-ब्रॉगली द्वारा प्रस्तावित किया गया, जिससे पदार्थ की तरंग प्रकृति सिद्ध हुई।

प्रश्न 11. डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य किसे कहते हैं?
उत्तर: गतिमान कण से संबद्ध तरंग की तरंगदैर्घ्य को डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य कहते हैं, जो कण के संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

प्रश्न 12. डी-ब्रॉगली सिद्धांत का महत्व लिखिए।
उत्तर: डी-ब्रॉगली सिद्धांत ने यह सिद्ध किया कि केवल प्रकाश ही नहीं बल्कि सभी गतिमान कण तरंग गुण प्रदर्शित करते हैं, जिससे क्वांटम यांत्रिकी का विकास संभव हुआ।

प्रश्न 13. इलेक्ट्रॉन विवर्तन प्रयोग क्या सिद्ध करता है?
उत्तर: इलेक्ट्रॉन विवर्तन प्रयोग यह सिद्ध करता है कि इलेक्ट्रॉन जैसे कण भी तरंग प्रकृति प्रदर्शित करते हैं, जो डी-ब्रॉगली की अवधारणा का प्रायोगिक प्रमाण है।

प्रश्न 14. प्रकाश की तरंग प्रकृति के दो प्रमाण लिखिए।
उत्तर: हस्तक्षेप और विवर्तन प्रकाश की तरंग प्रकृति के प्रमुख प्रमाण हैं, जिन्हें केवल तरंग सिद्धांत द्वारा ही समझाया जा सकता है।

प्रश्न 15. प्रकाश की कण प्रकृति के दो प्रमाण लिखिए।
उत्तर: प्रकाश-वैद्युत प्रभाव और कॉम्पटन प्रभाव प्रकाश की कण प्रकृति के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि प्रकाश ऊर्जा कणों के रूप में भी व्यवहार करता है।

प्रश्न 16. कॉम्पटन प्रभाव किसे कहते हैं?
उत्तर: जब एक्स-किरणें किसी मुक्त इलेक्ट्रॉन से टकराकर प्रकीर्णित होती हैं और उनकी तरंगदैर्घ्य बढ़ जाती है, तो इस घटना को कॉम्पटन प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 17. द्वैत प्रकृति अध्याय का महत्व लिखिए।
उत्तर: यह अध्याय शास्त्रीय और आधुनिक भौतिकी के बीच सेतु का कार्य करता है तथा प्रकाश और पदार्थ के व्यवहार को गहराई से समझने में सहायता करता है।

प्रश्न 18. प्रकाश-वैद्युत प्रभाव में तीव्रता की भूमिका बताइए।
उत्तर: प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है, लेकिन उनकी अधिकतम गतिज ऊर्जा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रश्न 19. डी-ब्रॉगली तरंगें क्यों प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखी जा सकतीं?
उत्तर: क्योंकि सामान्य वस्तुओं का द्रव्यमान बहुत अधिक होता है, जिससे उनका डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य अत्यंत छोटा हो जाता है और वह प्रेक्षणीय नहीं रहता।

प्रश्न 20. द्वैत प्रकृति का आधुनिक तकनीक में उपयोग लिखिए।
उत्तर: इस सिद्धांत का उपयोग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, सेमीकंडक्टर उपकरण, नैनो तकनीक और क्वांटम इलेक्ट्रॉनिक्स में व्यापक रूप से किया जाता है।

कक्षा 12 – भौतिक विज्ञान (Board EXAM 2026)

भाग–12 | अध्याय 12 : परमाणु एवं नाभिक

20 अति-महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. परमाणु किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी तत्व का वह सबसे छोटा कण जो रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग ले सकता है, परमाणु कहलाता है। परमाणु में केंद्रक तथा उसके चारों ओर परिक्रमा करते इलेक्ट्रॉन होते हैं।

प्रश्न 2. परमाणु की संरचना समझाइए।
उत्तर: परमाणु के केंद्र में धनावेशित केंद्रक होता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन पाए जाते हैं। केंद्रक के चारों ओर ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन विभिन्न ऊर्जा स्तरों में घूमते हैं।

प्रश्न 3. रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल क्या है?
उत्तर: रदरफोर्ड के अनुसार परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है, केंद्र में छोटा, सघन और धनावेशित केंद्रक होता है तथा इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं।

प्रश्न 4. रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ लिखिए।
उत्तर: यह मॉडल परमाणु की स्थिरता और रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका, क्योंकि इसके अनुसार परिक्रमा करता इलेक्ट्रॉन ऊर्जा खोकर केंद्रक में गिर जाना चाहिए।

प्रश्न 5. बोर का परमाणु मॉडल लिखिए।
उत्तर: बोर के अनुसार इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित ऊर्जा कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं और इन कक्षाओं में ऊर्जा का विकिरण नहीं करते, जिससे परमाणु स्थिर बना रहता है।

प्रश्न 6. बोर मॉडल की सफलता लिखिए।
उत्तर: बोर मॉडल ने हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्रम और उसकी ऊर्जा स्तरों की सफलतापूर्वक व्याख्या की, जिससे परमाणु संरचना को समझने में बड़ी सहायता मिली।

प्रश्न 7. बोर मॉडल की सीमाएँ लिखिए।
उत्तर: बोर मॉडल केवल एक-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं पर लागू होता है। यह बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं और सूक्ष्म स्पेक्ट्रल विभाजन की व्याख्या नहीं कर पाता।

प्रश्न 8. नाभिक किसे कहते हैं?
उत्तर: परमाणु के केंद्र में स्थित वह सघन भाग जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं, नाभिक कहलाता है। इसमें परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान केंद्रित रहता है।

प्रश्न 9. नाभिकीय बल क्या है?
उत्तर: नाभिकीय बल प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के बीच कार्य करने वाला अत्यंत शक्तिशाली आकर्षण बल है, जो विद्युत प्रतिकर्षण के बावजूद नाभिक को स्थिर बनाए रखता है।

प्रश्न 10. द्रव्यमान दोष किसे कहते हैं?
उत्तर: नाभिक के अवयवों के पृथक द्रव्यमानों के योग और वास्तविक नाभिकीय द्रव्यमान के अंतर को द्रव्यमान दोष कहते हैं, जो नाभिकीय ऊर्जा से संबंधित होता है।

प्रश्न 11. बंधन ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर: नाभिक को उसके सभी न्यूक्लियॉनों में पूर्णतः तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा को नाभिकीय बंधन ऊर्जा कहते हैं, जो नाभिक की स्थिरता का माप है।

प्रश्न 12. रेडियोधर्मिता किसे कहते हैं?
उत्तर: कुछ अस्थिर नाभिकों का स्वतः क्षय होकर α, β और γ किरणें उत्सर्जित करना रेडियोधर्मिता कहलाता है। यह एक नाभिकीय प्रक्रिया है।

प्रश्न 13. α-क्षय क्या है?
उत्तर: α-क्षय में नाभिक से हीलियम नाभिक निकलता है, जिससे परमाणु क्रमांक 2 और द्रव्यमान संख्या 4 कम हो जाती है।

प्रश्न 14. β-क्षय क्या है?
उत्तर: β-क्षय में नाभिक से इलेक्ट्रॉन या पोज़िट्रॉन निकलता है, जिससे परमाणु क्रमांक बदलता है लेकिन द्रव्यमान संख्या लगभग अपरिवर्तित रहती है।

प्रश्न 15. γ-किरणें क्या हैं?
उत्तर: γ-किरणें उच्च ऊर्जा वाली विद्युतचुंबकीय तरंगें होती हैं, जो नाभिकीय क्षय के बाद नाभिक के उत्तेजित अवस्था से निकलती हैं।

प्रश्न 16. अर्ध-आयु किसे कहते हैं?
उत्तर: वह समय जिसमें किसी रेडियोधर्मी पदार्थ के आधे नाभिक क्षय हो जाते हैं, अर्ध-आयु कहलाता है। यह पदार्थ-विशेष का गुण होता है।

प्रश्न 17. नाभिकीय विखंडन किसे कहते हैं?
उत्तर: भारी नाभिक का टूटकर दो या अधिक हल्के नाभिकों में बदल जाना नाभिकीय विखंडन कहलाता है, जिसमें बहुत अधिक ऊर्जा मुक्त होती है।

प्रश्न 18. नाभिकीय संलयन किसे कहते हैं?
उत्तर: दो या अधिक हल्के नाभिकों का मिलकर एक भारी नाभिक बनाना नाभिकीय संलयन कहलाता है। यह प्रक्रिया सूर्य और तारों में ऊर्जा का स्रोत है।

प्रश्न 19. नाभिकीय ऊर्जा का एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन, चिकित्सा में कैंसर उपचार तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में किया जाता है, क्योंकि इसमें बहुत अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

प्रश्न 20. परमाणु एवं नाभिक अध्याय का महत्व लिखिए।
उत्तर: यह अध्याय पदार्थ की आंतरिक संरचना और नाभिकीय ऊर्जा को समझने का आधार प्रदान करता है, जिससे आधुनिक भौतिकी, ऊर्जा तकनीक और चिकित्सा विज्ञान का विकास हुआ है।

 

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